Anurag Pandey भारतीय राष्ट्रवाद और भारतीय राष्ट्रवाद की जिन्गोइस्ट अवधारणा "उपनिवेशकाल से अब तक"

Updated: Mar 18

राष्ट्रवाद का अर्थ सामान्यतः राष्ट्र के व्यक्तियों द्वारा राष्ट्र के साथ अपनी खुद की पहचान को जोड़ना होता हैं, राष्ट्र के प्रति लगाव एवं अपने राष्ट्र के हितों को एक राष्ट्रवादी हमेशा सर्वोपरी रखता/रखती हैं। राष्ट्रवाद अधिकतर मामलों में किसी दूसरे राज्य, उस राज्य के निवासियों का बहिष्कार या उनके तीक्ष्ण विरोध पर आधारित होता है। ये कहा जा सकता है के कई मामलों में राष्ट्रवाद किसी अन्य राज्य, उस राज्य के नागरिकों, नागरिक समाज एवं सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था से नफ़रत, घृणा और उन्हें कमतर आंकने या उस राज्य को छोटा साबित करने के सिद्धांतों इत्यादि पर आधारित होता है। राष्ट्रवाद का ये स्वरुप विकृत होता है।

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